बाइबल का अनूठापन - भाग २

इस बात पर विश्वास करना कठिन है कि बाइबल परमेश्वर का कार्य नहीं है।


ध्यान से देखें और विचार करें

पाठ ३, में हमने बाइबल की विविधता और समरसता और उसकी पाठकीय विश्वसनीयता पर विचार किया था- यह ऐसी दो विशेषताएँ हैं जो बाइबल को दुनिया की सबसे अनूठी पुस्तक बनाती हैं। आज हम दो और विशेषताओं पर बात करेंगे जो बाइबल को किसी भी अन्य पुस्तक से भिन्न करती हैं और साथ ही इस बात को पुख्ता करती हैं कि बाइबल जीवन-यात्रा में सबसे भरोसेमंद संदर्भ बिंदु है।

बाइबल अपनी ऐतिहासिक सटीकता में अनूठी है।

ऐतिहासिक सटीकता एक और कारक है जिसे किसी प्राचीन लेख की विश्वसनीयता निर्धारित करते समय ध्यान में रखना चाहिए। दूसरे शब्दों में कहें तो, "क्या पुरातत्व विज्ञान की खोजें उस लेख में दर्ज़ की गई बातों की पुष्टि करती हैं?"  बाइबल के संदर्भ में, इसका उत्तर बिलकुल स्पष्ट है –

  • ".... यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि किसी भी पुरातत्व विज्ञान की खोज ने कभी भी बाइबल के संदर्भ में किसी प्रकार का खंडन नहीं किया है। पुरातत्व विज्ञान की ऐसी अनेक खोजें हैं जो स्पष्ट रूपरेखा या सटीक विस्तृत जानकारी के साथ बाइबल में दर्ज़ ऐतिहासिक कथनों की पुष्टि करती हैं। और, उसी तरह, बाइबल में दर्ज़ विवरणों के समुचित मूल्यांकन ने भी कई बार आश्चर्यजनक खोजों को जन्म दिया है।”  

          - डॉ नेल्सन ग्लूक- “रिवर्स इन द डेजर्ट” पृष्ठ ३१

  • "... पुरातत्व विज्ञान ने ऐसे कई अनुच्छेदों की पुष्टि की है जिन्हें आलोचकों ने गैर-ऐतिहासिक या ज्ञात तथ्यों के विरोधाभासी करार करते हुए खारिज कर दिया था....किन्तु फिर भी पुरातात्विक खोजों से पता चला है कि ये आलोचनात्मक आरोप गलत हैं और बाइबल उस हर एक कथन पर विश्वसनीय साबित हुई है जिस पर उसे विश्वास न करने योग्य कहा गया था....हमें ऐसे किसी भी संदर्भ का पता नहीं है जहाँ बाइबल गलत साबित हुई है।"

          - डॉ जोसेफ पी. फ्री (आर्किओलॉजी एंड बाइबल हिस्ट्री"  पृष्ठ १, २, १३४)

बाइबल अपनी भविष्यवाणियों के अभिलेख में अनूठी है।     

बाइबल में दर्ज़ भविष्यवाणियों के अभिलेख पर विचार करने से पहले यह समझना आवश्यक है कि वह क्या बात है जो बाइबल के भविष्यवक्ताओं को अन्य तथाकथित भविष्यवक्ताओं से भिन्न करती है। बाइबल की व्यवस्थाविवरण की पुस्तक के अनुसार, परमेश्वर के एक सच्चे भविष्यवक्ता की परीक्षा इस बात से होती थी कि वह शत-प्रतिशत सटीक हो। यदि स्वयं को भविष्यवक्ता बताने वाला इस परीक्षा में सफल नहीं हो कर पाता था तो उसका दंड होता था -मृत्यु1 अब यही तो परमेश्वर को सटीकता से ज़ाहिर करने के लिए एक प्रेरणा है!

कितना अद्भुत है यह जानना कि बाइबल में १८०० से अधिक भविष्यवाणियाँ हैं2 इनमें से कई भविष्यवाणियाँ तो उन भविष्यवक्ताओं के जीवन काल में ही पूरी हो चुकी हैं जिन्होंने उन्हें प्रकट किया था। बाइबल के लिखे जाने से लेकर अब तक कई और भी पूरी हो चुकी हैं। कई भविष्यवाणियों का पूरी होना अभी बाकी है। आज के दिन तक, बाइबल की कोई भी भविष्यवाणी कभी झूठी साबित नहीं हुई है!

बाइबल के पुराने नियम में ३०० से अधिक ऐसी भविष्यवाणियाँ हैं, जो विशेष रूप से यीशु मसीह द्वारा पूर्ण की गई थीं, जैसा कि नए नियम में दर्ज़ है3 अपनी पुस्तक साइंस स्पीक्स में पीटर स्टोनर ने गणना करके बताया कि यदि किसी एक व्यक्ति में इन ३०० से अधिक भविष्यवाणियों में से ८ भी पूरी हो जाएँ तो उसकी गणितीय प्रायिकता (संभावना) क्या होगी। और इस का परिणाम था १० का १७वाँ घातांक में से १ या  १००,०००,०००,०००,०००,००० में १ 4

स्टोनर ने इस संख्या को समझाते हुए कहा है, "मान लें कि हम १०१७ सिल्वर डॉलर ( पुराने चलन में १ डालर का चाँदी का सिक्का ) लें और उसे टेक्सास राज्य पर बिछा दें। ये सिल्वर डॉलर पूरे राज्य को २ फीट गहराई तक ढक देंगे। (अधिक सरलता से समझने के लिए मान लीजिए कि पंजाब राज्य के पूरे क्षेत्र को यदि दो फुट गहराई तक सिक्कें बिछा दिए जाएं ) आप इन सिल्वर डॉलरों में से किसी एक पर निशान लगा दें और आप पूरे राज्य में फैले इस ढेर को अच्छे से हिला दें। फिर एक व्यक्ति की आँखों पर पट्टी बाँध दें और उससे कहे कि वह जहाँ चाहे वहाँ घूम सकता है लेकिन उसे वही निशान लगा हुआ सिल्वर डॉलर ढूँढ निकलना और कहना है कि "यही वह है"। इस बात की संभावना कितनी है कि वह उसी सिक्के को ढूँढ निकाल पाएगा? बस उतनी ही संभावना है कि किसी एक व्यक्ति में ये आठों भविष्यवाणियाँ सही साबित हो जाएँ ।”5

फिर जब स्टोनर ने इस प्रायिकता की गणना की कि किसी एक व्यक्ति में ४८ भविष्यवाणियाँ पूर्ण हो सकती हैं, तो परिणाम आया- १०१५७ में १ यानी १० के आगे १५६ शून्य लगे हैं। ज़रा कल्पना कीजिए कि कितना असंभव है कि एक व्यक्ति इन तीन सौ से अधिक भविष्यवाणियाँ पूर्ण कर सके जो यीशु मसीह में पूर्ण हो चुकीं हैं। इस गणितीय प्रायिकता के परिणाम में आने वाले घातांक अर्थात् १० के आगे शून्य को लिखने के लिए तो इस पूरी अध्ययन मार्गदर्शिका के पन्ने भी कम पड़ जाएँगे। सच तो यह है कि, परमेश्वर की इच्छा के बिना किसी एक व्यक्ति में इन सभी भविष्यवाणियों का पूर्ण होने का संयोग संभव ही नहीं है।

पूछें और मनन करें

  • इससे पहले एक कथन रखा गया था कि जब कोई सही मायने में बाइबल के स्वरूप पर विचार करता है, तो जितना आसान उसके लिए इस बात पर विश्वास करना होता है कि यह परमेश्वर का कार्य है उतना ही कठिन उसके लिए इस बात पर यकीन करना होता है कि इसे मनुष्यों के द्वारा मात्र लिखा और संग्रहित किया गया है।                                                                                                                                                                                                           

     क्या आप इस कथन से सहमत हैं? यदि नहीं, तो क्यों? यदि नहीं, तो बाइबल की भविष्यवाणियों को कैसे स्पष्ट करेंगे जो पूर्ण हो चुकी है?     

  • पाठ १ में हमने जीवन के उद्देश्य के बारे में बात की थी। पाठ २ में हमने जीवन-यात्रा में अपना मार्ग खोजने के लिए एक संदर्भ बिंदु की आवश्यकता के बारे में बात की थी 3पाठ ३ और ४ में हमने कई कारणों पर विचार किया है कि जीवन के लिए बाइबल सबसे भरोसेमंद संदर्भ बिंदु क्यों है। 

     यदि जीवन के लिए आपका संदर्भ बिंदु बाइबल के अलावा कुछ और है, तो क्या उसकी बराबरी बाइबल से की जा सकती है?

निर्णय लें और करें 

पाठ २ में बताए गए उस कथन को याद करें जो कहता है कि आपकी धारणा आपके मार्ग को निर्धारित करती है, और आपका मार्ग आपकी नियति निर्धारित करता है। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है कि जीवन में आपके संदर्भ बिंदु के रूप में आप किस पर भरोसा करते हैं।

भजन संहिता119:105 कहता है कि परमेश्वर का "वचन मेरे पाँव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।"  यदि आपके मन में इस बारे में कुछ अनसुलझे प्रश्न हैं कि आप बाइबल पर अपने जीवन में संदर्भ बिंदु के रूप में भरोसा कर सकते हैं या नहीं। तो आज ही निर्णय लें कि आप उन सभी प्रश्नों का समाधान ढूँढने का प्रयास करेंगे जिनसे आप जूझ रहे हैं। अपने प्रश्नों की एक सूची बनाएँ, और फिर गहराई से उनके उत्तर ढूँढने के लिए किसी पासवान या बाइबल शिक्षक की सलाह लें।

For Further Study

  • Josh McDowell, Evidence That Demands a Verdict, Historical Evidences for the Christian Faith, Revised Edition. (© Campus Crusade for Christ, Inc. HERE’S LIFE PUBLISHERS, INC, San Bernardino, Ca, 1972).
  • Ron Ritchie, The Messianic Prophecies (Discovery Publishing Company, Palo Alto, CA, 1993). (http://www.pbc.org/series/the-messianic-prophecies). Retrieved October 5, 2006.

Footnotes

1Deut. 18:20.
2J. Barton Payne’s Encyclopedia of Biblical Prophecy (© New York: Harper & Row, 1973) lists 1,239 prophecies in the Old Testament and 578 prophecies in the New Testament, for a total of 1,817. These encompass 8,352 verses.
3Josh McDowell, Evidence That Demands a Verdict, Historical Evidences for the Christian Faith, Revised Edition. (© Campus Crusade for Christ, Inc. HERE’S LIFE PUBLISHERS, INC, San Bernardino, Ca, 1972, p. 144).
4Peter Stoner in Science Speaks (Chicago: Moody Press, 1963). [This title is currently out of print. (http://www.amazon.com/exec/obidos/ASIN/0802476309/abundanlifeher0c)]. Referenced in Evidence That Demands a Verdict, by Josh McDowell, 1979 edition, pages 166,167.
5Ibid.
6Ibid.

Scripture quotations taken from the NASB