एक आम प्रश्न

क्या कोई उद्देश्य है... संसार के लिए और मेरे लिए?


प्रस्तावना

"आशा" वीडियो इन शब्दों के साथ आरंभ होता है ...

हमेशा से ही, लोगों ने जिस संसार में हम रहते हैं, उसके बारे में विचार किया है; प्रकृति की जटिलता और सुंदरता, जीवन और मृत्यु का रहस्य, मानवीय प्रसन्नता और व्यथा की गहराई ...और वे अचरज करते हैं - “ये सब कहाँ से आरंभ हुआ?” क्या ये संसार परिणाम है - एक संयोग का, या एक रचना का? क्या कहीं कुछ है या कोई है, इस सब के पीछे? और यदि ऐसा कोई जन है, तो वह कैसा है? क्या उसके पास इस संसार के लिए कोई उद्देश्य है? क्या उसके पास इस संसार में मेरे लिए कोई उद्देश्य है? क्या उसके पास इस संसार से परे मेरे लिए कोई उद्देश्य है? 

- "आशा" वीडियो, प्रस्तावना

ध्यान से देखें और विचार करें

"आशा" के आरंभ में उठाए गए प्रश्न नए नहीं हैं। हमेशा ही लोगों ने अपने जीवन के अर्थ और उद्देश्य पर विचार किया है, और उन्होंने किसी दिव्य सृष्टिकर्त्ता की उपस्थिति के बारे में प्रश्न किए हैं। कई लोगों के लिए उद्देश्य और परमेश्वर के अस्तित्व के बारे में उठे प्रश्न अलग-अलग नहीं हैं। यहाँ तक कि बीसवीं सदी के एक प्रख्यात नास्तिक बर्ट्रेंड रसेल ने एक बार कहा था, "जब तक आप ईश्वर को मान नहीं लेते, जीवन के उद्देश्य का प्रश्न व्यर्थ है।” 1 

एक कट्टर नास्तिक भला ऐसा वक्तव्य क्यों देगा? क्योंकि उद्देश्य का तात्पर्य है प्रयोजन, और प्रयोजन का तात्पर्य है अभिकल्प या डिज़ाइन है। और यदि इस संसार का एक अभिकल्प है, तो कोई अभिकल्पक या डिज़ाइनकार भी होना चाहिए। सम्भवत: तब, जीवन के उद्देश्य से भी अधिक बुनियादी प्रश्न उठें।

क्या कोई अभिकल्पक है... क्या इस अभिकल्पक को जाना जा सकता है? कृपया समझने का प्रयास करें कि "आशा" का प्रयोजन परमेश्वर को सिद्ध करना नहीं है... बल्कि उसको उजागर करना है। जैसे कि कथाकार वीडियो के आरंभ में बोलता है, "उन के लिए, जो इनके उत्तर ढूँढ रहे हैं, उन के लिए जो सुन रहें हैं, एक वाणी है।"

आपके बारे में क्या? क्या आप सुन रहे हैं? शायद आपने पहले से ही अपना मन बना लिया है कि परमेश्वर का कोई अस्तित्व नहीं है, या फिर शायद आप मानते हैं कि परमेश्वर है लेकिन आप नहीं जानते कि वह कैसा है? हमारे इस अध्ययन के उद्देश्य से, इससे पहले कि आप आगे बढ़ें, शायद आपको अपने आप से यह प्रश्न पूछना चाहिए, "क्या मैं वास्तव में सुन रहा हूँ? क्या ऐसा हो सकता है कि परमेश्वर के बारे में कुछ ऐसा है जो मैंने अभी तक नहीं सुना या समझा हो?"

बाइबल में एक पद है जो बताता है कि परमेश्वर बड़े लंबे समय से बात कर रहा है किंतु मनुष्य ने उसकी बात हमेशा नहीं सुनी और न ही हमेशा उसका प्रकाशन ग्रहण किया।

"क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात् उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते है, यहां तक कि वे निरुत्तर हैं। इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया।" (रोमियों १:२०- २१)|

परमेश्वर चुप नहीं है। समय के आरंभ से ही उसने अपनी सृष्टि के माध्यम से बात की है। और उतने ही लंबे समय से लोगों ने परमेश्वर कैसा है यह सोचने का निर्णय अपने हाथों में ले लिया है, बजाय इसके कि वे इस प्रकटीकरण को बस सरलता से ग्रहण करते और परमेश्वर को आदर देते। जैसे की हम रोमियों १ के पद में देखते हैं, ऐसी अटकलों का परिणाम व्यर्थ होता है। यदि हम  रोमियों १, में आगे पढ़ें, तो हम देखेंगे कि इस तरह की अटकलें अंततः विनाशकारी होती हैं।

हमारे अध्ययन में चलने के लिए, क्या आप परमेश्वर को जैसा वह स्वयं को प्रकट करता है वैसा ही समझेंगे या उसके बारे में और अधिक जानने का निश्चय करेंगे? क्या आप परमेश्वर के बारे में अपने विचारों या अटकलों पर ध्यान देने की बजाय उसकी बात सुनेंगे? यदि आप ऐसा करेंगे, तो यह अध्ययन मार्गदर्शिका विश्वास के लिए काफी रोचक सिद्ध हो सकती है।

पूछें और मनन करें

  • लोग प्रायः केवल वही सुनते हैं जो वे सुनना चाहते हैं (या जो उन्हें लगता है कि उन्हें सुनना चाहिए)। कुछ ऐसी बातों पर विचार करें जो किसी को सुनने से, और वास्तव में परमेश्वर से सुनने से रोक सकती हैं:
    • घमंड – नियंत्रण में रहना चाहिए
    • जीवन शैली – वह व्यवहार जो हम सहज ज्ञान से जानते हैं परमेश्वर को स्वीकार नहीं है, किंतु हम बदलना नहीं चाहते
    • घायल अवस्था – हमारे अतीत के दुखद अनुभव जो हमें दूसरों पर भरोसा करने से रोकते हैं
  • और कौन-सी बातें हो सकती हैं एक व्यक्ति को सुनने से और वास्तव में परमेश्वर की सच्चाई को सुनने से रोक सकती हैं?
  • आप इस प्रश्न का उत्तर कैसे देंगे, "जीवन का उद्देश्य क्या है?" या विशेष रूप से पूछे तो, "आपके जीवन का उद्देश्य क्या है?"
  • परमेश्वर के स्वरूप की आपकी कल्पना किस हद तक आपके अंदाज़े पर आधारित है बजाय उसके प्रकटीकरण पर आधारित होने के?

निर्णय ले और करें

बाइबल का एक और पद इस प्रकार कहता है,"तुम मुझे ढूँढोगे और पाओगे भी; क्योंकि तुम अपने सम्पूर्ण मन से मेरे पास आओगे।"(यिर्मयाह २९:१३)|

चाहे आप परमेश्वर के साथ अपनी यात्रा में किसी भी पड़ाव में हों, यह पद आपके लिए है। हो सकता है आप परमेश्वर के अस्तित्व के बारे में प्रश्न पूछ रहे हों, या फिर आपने स्वयं को पहले से ही एक विश्वासी मान लिया है लेकिन आप परमेश्वर को और अधिक आत्मीयता से जानना चाहते हैं। परमेश्वर वादा करता है कि जब हम उसे पूरे दिल खोजते हैं तो वह हमें मिल जाता है।

जब आप इस अध्ययन की शुरुआत करते हैं तो परमेश्वर को आपको दर्शाने देने के लिए कि वह कौन है और परमेश्वर और अपने बारे में नई चीजों की खोज करने के लिए स्वयं को तैयार करें। निश्चय कर लें कि आप पूरे दिल से उसे खोजेंगे," शायद आप इस आशय से एक उद्देश्य कथन लिखना चाहें: “अब जब मैं "आशा" के इस अध्ययन का आरम्भ करता हूँ तो मैं ...”

Footnotes

1Dr. Hugh Moorhead, The Meaning of Life (Chicago Review Press, December 1988). Dr. Moorhead, a philosophy professor at Northeastern Illinois University, once wrote to 250 of the best–known philosophers, scientists, writers, and intellectuals in the world, asking them, “What is the meaning of life?” Their responses are published in this book.